Tuesday, November 17, 2009

एक शुक्रिया..




कुछ बिखरे ख़याल , मन में अजीब सा मंथन, .....अपने प्रतिबिम्ब को बार बार देखने की चाह, मेरी अपनी मुट्ठी भर ज़मीन....इन सब में से मुझे थोड़ा सा तो ज़रूर ही चाहिए था ...
एक दिन ऐसे ही ऑफिस में हँसते खेलते ठहाको के बीच पता लगा की ब्लॉग असल में होता क्या है...
ये शुक्रिया मेरे उन साथियों के नाम है , जिन्होंने मुझे सिखाया ...
मेरी धुंदली होती सी एक अच्छी दोस्ती, मुझे काफ़ी दिनों से लग रहा है की, उस पर से बादल हट रहे है....शायद उसे पता है...कई बार नाम लेना, बस काफ़ी नही होता...
मेरा एक बहुत अच्छा दोस्त जो लगता है , अगर मुझे दिन भर में थोड़ी सी भी इज्ज़त दे देगा ,तो शायद उसका दिन ख़राब हो जाएगा।
लेकिन शायद जिंदगी ऐसे ही थोड़ी फीकी सी अच्छी लगती है...अगर सब अच्छा हो तो शायद अच्छे होने के मायने ही बदल जाए....

7 comments:

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  2. मै कब कहता हूं जग मेरी दुर्धर गति के अनुकूल बने,
    मैं कब कहता हूं जीवन मरु नन्दन कानन का फूल बने,
    कांटा कठोर है, तीखा है, उसमें उसकी मर्यादा है,
    मैं कब कहता हूं, वह घट कर प्रान्तर का ओछा फूल बने,
    मै कब कहता हूं मुझे युद्द में कहीं ना तीखी चोट मिले,
    मै कब कहता हूं चाह करूं तो मुझे प्राप्ति की ओट मिले,
    मै कब कहता हूं विजय करूं मेरा ऊंचा प्रासाद बने,
    या पात्र जगत की श्रदा की मेरी धुधली सी याद बने,
    पथ मेरा रहे प्रश्शत सदा क्यों विकल करे यह चाह मुझे,
    नेत्रत्व ना मेरा छिन जाये क्यों हो इसकी परवाह मुझे,
    मैं प्रस्तुत हूं चाहे मेरी मिट्टी जनपद की धूल बने,
    फिर उसी धूल का कण कण भी मेरा गतिरोधक शूल बने,
    अपने जीवन का रस देकर जिसको यत्नों से पाला है,
    क्या वह केवल अवसाद मलिन झरते ऑसू की माला है,
    वे रोगी होंगे प्रेम जिन्हें अनुभव रस का कटु प्याला है,
    वे मुर्दे होंगे प्रेम जिन्हें सम्मोहनकारी हाला है,
    मैनें विदग्ध हो जान लिया अन्तिम रहस्य पहचान लिया,
    मैनें आहुति बन कर देखा यह प्रेम यज्ञ की ज्वाला है,
    मै कहता हूं, मैं करता हूं, नभ की चोटी पर चढता हूं,
    कुचला जाकर भी धूली सा, ऑधी सा और उमडता हूं,
    मेरा जीवन ललकार बनें, असफलता ही असि धार बने
    इस निर्मम रण में पग पग पर रुकना ही मेरा वार बने
    भव सारा तुझको है स्वाहा, सब कुछ तप कर अंगार बने
    तेरी पुकार सा दुर्निवार मेरा यह नीरव प्यार बने।

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  3. I never knew that u r so gud in Hindi....very well written...

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  4. naina so gud yaar tumto bhuat accha likti ho.

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  5. su seriously yaar,,,first time...mjhe esa lag raha hai ke es hanste khelte chehre ke peeche kitne gum chipe hue hain...bt u r avery gud writer as well idindnt kno dis before...

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  6. sab acha ho jaey to shayad duniya se buraey ka namo-neeshan mit jaey..sab acha ho jaey.. duneya se buraey kahen kho jaey...to shayad Humare ache hone ka namo-neesham duniya se mit jaey aur Hum duniya ke buraey main kahen kho jaey..lekin zindage aise he thodi feeki se ache lagte hai... acha aur bura dono mann ko bhaey...


    Monisha

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