Wednesday, November 6, 2013

बड़ी ही लम्बी हो चली है तुम्हारे जाने के बाद ये ज़िंदगी......
तुम्हारे साथ, तो ये वक़्त हमेशा कम ही लगा।.....
लगने लगे हैं ये कुछ अदने से लब्ज़ अब भारी मुझे.....
तुम्हारी खलिश ज़िंदगी का एक अलग हे आईना दिखा गई...
क्यूं बार बार लड़ने के बाद भी..,
एक बार प्यार सिर्फ तुम्ही से होता है.??
फीकी फीकी सी हो जाती है
वो ज़िंदगी जिसमे नमक नहीं होता....
समेट कर बैठे थे हम अपने चंद कीमती लम्हो को.....
की..... क्यूं फिर उसी बारिश ने मेरा सब कुछ बिखेर दिया ....
लाजवाब है मेरे हर बार नये मुट्ठी भर सवाल
और उस पर बेहिसाब है तुम्हारा वही एक ही जवाब.
हो तो गयी है, मेरी रुक्सती तुम्हारी ज़िंदगी से,
अंजान हो गए हो तुम, एक बार फिर से हमसे..
फर्क सिर्फ इतना है...........
वहाँ तुम्हरी ज़िंदगी चल रही है।....
और यहां मेरी ये ज़िंदगी बस जल रही है..
i must grow old but i shall die young.......
happy and a safe diwali to all:)))))))
तेरे वक़्त के साथ मेरा ये सुकून बस यूं ही चलता है
जैसे दो सितारों की मोहब्बत मे खलल पड़ता है..
मगर चाँद पागल है जो फिर भी निकल पड़ता है....
ये तलाशती आँखें अपने अंदर ना जाने कौन से अन्जाने मंज़र को ढूंडती हैं
जब तू खुद ही मेरे ज़ेहन मे घुस कर बैठा है, तो फिर बार बार किसे ये बाहर ढूंडती है???
आज है वक्त तुम्हारा, तो कल हमारा भी होगा,...
साथ छूटेगा गर , तब भी पार मेरा किनारा होगा .....
फर्क ना तुम मे , ना मुझ मे कुछ ज्यादा होगा..
एक गुनाह तुम्हारा और एक गुनाह हमारा होगा।
यहाँ फिक्र नहीं किसी को, की बिगड़ता किसी की ज़िंदगी का ताना बाना होगा...
अब तो झूठी मुस्कुराहटे लेकर, तेरी हर मेहफिल मे मेरा आना होगा...
इल्म रखो मगर, की इस ज़िक्र के बिना ना तुम्हारा और ना ही मेरा गुज़ारा होगा..
तेरी गुज़री ज़िंदगी के चंद ताश के पत्ते मुझे यूं बर्बाद नहीं कर सकते.
चाह कर देख लो , मगर ये आँसूं तेरा घर कभी आबाद नहीं कर सकते

लिख रहे थे दास्ताने ज़िंदगी, चड़ रही थी परवाने मोहब्बत
इश्क़ खुमारी पे था ,और बस दिल यूं ही बेह रहा था...
की किसे पता था, की मेरी कहानी का आखिरी पन्ना, कब किसी और की किताब के नाम हो जायेगा

क्या गज़ब की शिद्दत थी तेरी दुश्मनी मे जो हम तेरे हो गए
गलत सुना था ,की सिर्फ प्यार मे ही ऐसा होता है.....