Friday, December 20, 2013

बस यूँहीं अच्छा सा लगा मुझे और उन्हें भी।


दिन बुधवार, महीना डिसेंबेर का, 19 तारीख , आज काल मेरा ऑफ थोड़ा जल्दी हो जाता है, इसके चलते मई घ्रर भी जल्दी पहुच जाती हूँ। घर आते समय जब रास्ते मे ड्राइव कर रही होती हूँ तो बस दिमाग मे यही होता है की कैसे जल्दी घर पहुचु क्यूंकि वहाँ मेरी गाड़ी की आवाज़ सुनते ही मेरी बेटी गेट की तरफ दौड़ पड़ती है. मुझे बहुत अक्छा लगता है जब वो मुझे किसी को छुने नहीं देती, ना ही मेरा समान किसी को हाथ लगाने देती है। एनीवेस मुद्दा आज मेरी बेटी का नहीं बल्कि संगीता आंटी का है। 
आइये आपकी पहचान कराते हैं संगीता आंटी से। …। 
बात अगर रंग कि करें तो मै कहूंगी "नो कमेंट्स "। उम्र तक़रीबन ६० साल कद करीबन ४ फुट कुछ इंच सर पर कुछ खिचड़ी बालों का जुड़ा, बदन पर ज्यादातर सूती धोती होती है, और हाँ जीरो फिगर है बंदी का और वो भी माइनस में .… मेरे ऐसा कहने से आपने सोचा होगा मस्त बेब्स टाइप्स आंटी कि बात हो रही है। …नही ! मुझे थोडा और ऐड करने दीजिये।। मोहतरमा के मुह में पान मसाला भी होता हैं और पैरों में घिसी हुई हवाई चप्प्ल .…
सही मायने में बोलूं तो वो मेरे घर की एक बहुत इम्पोर्टेन्ट लाइफलाइन है.…। आज घर पर गैस ख़त्म हो गयी थी, और घर वालों के काफी गणित लगाने पर भी कुछ जुगाड़ बन नहीं पा रहा था। फिर क्या था लाइफलाइन जीवित हो गयी और बोली कि लाइए हमें एक जगह पता है जहाँ पर छोटा सिलिंडर भर जाता। फिर क्या था सबके चेहरो पर कोलगेट वाली स्माइल आ गई। . आंटी ने छोटे सिलिंडर को अपने दाहिने हाथ में उठाकर कहा 'अभी आते हैं'. अच्छा हाँ हम उन्हें इसलिए लाइफलाइन बुलाते हैं क्यूंकि वो किसी काम के लिए मना नहीं करती हैं. घर वालों ने कहा कि रिक्शा से चली जाओ.  लेकिन फिर किसी ने मुझसे कहा कि अरे स्कूटी से चली जाओ. फिर क्या था संगीता आंटी और मै ,चल पड़े स्कूटी पर, छोटा वाला सिलिंडर लेकर। 
मै तो रोज़ कि तरह ही स्कूटी चला रही थी लेकिन नया तो उनके लिए था. वो मेरे पीछे बैठी और उन्होंने मेरे दाहिने कंधे पर हांथ रख रखा था. और मुझे बार बार केह रही थी कि बहु संभल के चलाना। मुझे अपने शीशे में दिख रहा था कि वो काफी खुश हैं.। 
वो बिलकुल वैसे ही खुश हो रही थी जैसे मेरी मम्मी खुश होती थी जब वो मेरे साथ स्कूटी पर जाती थी. पापा उन्हें अपने साथ कार में भी ले जाते थे लेकिन फिर भी वो मेरे साथ स्कूटी पर   ज्यादा खुश होती थी और हमेशा मेरे दाहिने कंधे पर अपना हांथ रखती थी जैसे कि आज आंटी ने रख रखा था और वो भी हमेशा संभल कर चलने को कहती थीं. 
चलिए मम्मी की बातें कभी किसी और पन्ने में करेंगे आज तो बात संगीता आंटी कि है. रास्ता काफी खराब था पर फिर भी पार हो गया।  तकरीबन १० मिनट्स की स्कूटी राइड के बाद आख़िरकार हम मंजिल पर पहुँच ही गयें। संगीता आंटी स्कूटी से उतरी और सिलिंडर को लेकर दुकान पर चली गयीं। मैंने स्कूटी पर  बैठी रहीं और पैरों पर ही टिका रहने दिया। ।   
अभी सोच ही रही थी ये कितनी दूर बेचारी पैदल आ रहीं थी। …  तब तक देखती हूँ तो संगीता आंटी के पैरों में चप्पल ही नहीं थी। । मुझे लगा शाय़द गिर गयी होगी।।। मैंने एकदम से पूछा अरे चप्पल कहाँ गयीं आपकी ?? तो बड़ा खुश हो कर बोलो अरे बहु गाडी में आये हैं तो चप्पल कि क्या ज़रुरत। ....... वो बहुत खुश थी स्कूटी पर बैठकर। । उनकी ख़ुशी वैसे ही थी जैसे मुझे पहली बार हवाईजहाज पर चढ़ कर हुई थी। ....... आंटी को मैंने थोडा और खुश कर दिया एक पान मसाला खिलाकर।
बस यूँहीं अच्छा सा लगा मुझे और उन्हें भी। 
  


Wednesday, November 6, 2013

बड़ी ही लम्बी हो चली है तुम्हारे जाने के बाद ये ज़िंदगी......
तुम्हारे साथ, तो ये वक़्त हमेशा कम ही लगा।.....
लगने लगे हैं ये कुछ अदने से लब्ज़ अब भारी मुझे.....
तुम्हारी खलिश ज़िंदगी का एक अलग हे आईना दिखा गई...
क्यूं बार बार लड़ने के बाद भी..,
एक बार प्यार सिर्फ तुम्ही से होता है.??
फीकी फीकी सी हो जाती है
वो ज़िंदगी जिसमे नमक नहीं होता....
समेट कर बैठे थे हम अपने चंद कीमती लम्हो को.....
की..... क्यूं फिर उसी बारिश ने मेरा सब कुछ बिखेर दिया ....
लाजवाब है मेरे हर बार नये मुट्ठी भर सवाल
और उस पर बेहिसाब है तुम्हारा वही एक ही जवाब.
हो तो गयी है, मेरी रुक्सती तुम्हारी ज़िंदगी से,
अंजान हो गए हो तुम, एक बार फिर से हमसे..
फर्क सिर्फ इतना है...........
वहाँ तुम्हरी ज़िंदगी चल रही है।....
और यहां मेरी ये ज़िंदगी बस जल रही है..
i must grow old but i shall die young.......
happy and a safe diwali to all:)))))))
तेरे वक़्त के साथ मेरा ये सुकून बस यूं ही चलता है
जैसे दो सितारों की मोहब्बत मे खलल पड़ता है..
मगर चाँद पागल है जो फिर भी निकल पड़ता है....
ये तलाशती आँखें अपने अंदर ना जाने कौन से अन्जाने मंज़र को ढूंडती हैं
जब तू खुद ही मेरे ज़ेहन मे घुस कर बैठा है, तो फिर बार बार किसे ये बाहर ढूंडती है???
आज है वक्त तुम्हारा, तो कल हमारा भी होगा,...
साथ छूटेगा गर , तब भी पार मेरा किनारा होगा .....
फर्क ना तुम मे , ना मुझ मे कुछ ज्यादा होगा..
एक गुनाह तुम्हारा और एक गुनाह हमारा होगा।
यहाँ फिक्र नहीं किसी को, की बिगड़ता किसी की ज़िंदगी का ताना बाना होगा...
अब तो झूठी मुस्कुराहटे लेकर, तेरी हर मेहफिल मे मेरा आना होगा...
इल्म रखो मगर, की इस ज़िक्र के बिना ना तुम्हारा और ना ही मेरा गुज़ारा होगा..
तेरी गुज़री ज़िंदगी के चंद ताश के पत्ते मुझे यूं बर्बाद नहीं कर सकते.
चाह कर देख लो , मगर ये आँसूं तेरा घर कभी आबाद नहीं कर सकते

लिख रहे थे दास्ताने ज़िंदगी, चड़ रही थी परवाने मोहब्बत
इश्क़ खुमारी पे था ,और बस दिल यूं ही बेह रहा था...
की किसे पता था, की मेरी कहानी का आखिरी पन्ना, कब किसी और की किताब के नाम हो जायेगा

क्या गज़ब की शिद्दत थी तेरी दुश्मनी मे जो हम तेरे हो गए
गलत सुना था ,की सिर्फ प्यार मे ही ऐसा होता है.....

Friday, August 16, 2013

i have all the rights to dATE anyone, but still not fall for you

i have all the rights to go for a movie, but still not date with you

i have all the right to go to disks n pubs, but not always with you

i have all the rights to be on phone for hours , it may be you or may not be you

i have all the rights to visit your FBwall, but still not like ny comment on it

finally ......

i have all the rights to flirt with you, but still not marry you......
कुछ अलग है मेरे लिए मेरी आजादी की कहानी ...........

क्यूंकि अब वक़्त मांगने का नहीं , छिनने का है,
आंसू बहाने का नहीं, दूसरो के आसूं निकलने का हैं,
चुप चाप ज़ुल्म सहने का नहीं, मुह तोड़ ज़वाब देने का है,
रास्ते धुंडने का नहीं , अपने रास्ते खुद तराशने का है… ..
किसी के रास्ते से हटने का नहीं
बल्कि उसके रास्ते का सबसे तगड़ा रोड़ा बनने का है. 

पुराने उबाऊ रिश्ते ढ़ोने का नहीं बल्कि नए रिश्ते बनाने का है
Independence day पर सिर्फ SMS भेजने का नहीं बल्कि दूसरो को अपने आजादी का मतलब समझाने का है…